Solar System Planet Saur Mandal (हमारा सौर मंडल और ग्रह, उपग्रह)

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Solar System Planet Saur Mandal

Solar System Planet Saur Mandal / हमारा सौर मंडल और ग्रह, उपग्रह / Our Solar System and Planets

जिस प्रकार आपका अपना परिवार है उसी प्रकार सूर्य का भी अपना परिवार है. सूर्य अपने परिवार का मुखिया है और अपने परिवार के सभी सदस्यों को ऊष्मा व प्रकाश देता है। ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह और उल्का पिंड इस परिवार के सदस्य हैं।सूर्य की मुखिया होने का कारण इस परिवार के सदस्य हैं। सूर्य के मुखिया होने के कारण इस परिवार को ‘सौर-परिवर’ या ‘सौरमंडल’ कहते हैं।

ग्रह (Planets)

कुछ आकाशीय पिंडो में स्वयं का प्रकाश व ऊष्मा नहीं होतो है। वे अपने तारे के प्रकाश से ही प्रकाशिक होते हैं।साथ ही वे अपने अक्ष (AXIS) पर घूमते हुए अपने तारे की परिक्रमा करते हैं। इन्हें ग्रह कहते हैं।

जैसे – हमारी पृथ्वी में स्वयं का प्रकाश नहीं है। हुआ सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होती है पृथ्वी एक ग्रह है जो सूर्य का चक्कर लगाती है।

ग्रह को अंग्रेजी भाषा में(Planet) कहते हैं, जो कि ग्रीक भाषा के (Planetai) शब्द से बना है।जिसका अर्थ होता है – ‘परिभ्रमण’ अर्थात चारों ओर घूमने वाला। Solar System Planet Saur Mandal

हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं – बुध (MERCURY),शुक्र (VENUS), पृथ्वी (EARTH), मंगल (MARS), बृहस्पति (JUPITER), शनि (SATURN),अरुण (URANUS) तथा वरुण (NEPTUNE) जो सौर मंडल में स्थित है।

ग्रहों के बारे में विस्तृत जानकारी…

सौरमंडल के ग्रहों के नाम व ग्रह का रंग –

1- बुध – सावला – भूरा
2- शुक्र – स्लेटी – काला
3- पृथ्वी – हरी – नीली
4- मंगल – लाल तांबे जैसा
5- बृहस्पति – गुलाबी
6- शनि – लाल – काला
7- अरुण – नीला
8 – अरुण – धुंधला स्लेटी

ग्रहों से सूर्य की दूरी तथा उपग्रह की संख्या

ग्रह       दूरी      उपग्रह संख्या
बुध –  6 करोड़ किमी.शून्य
शुक्र –  11करोड़ किमी. शून्य
पृथ्वी – 15 करोड़ किमी. 1 (चन्द्रमा)
मंगल – 24 करोड़ किमी. 2
बृहस्पति –77 करोड़ किमी. 16
शनि   – 142 करोड़ किमी. 20
अरुण  – 287 करोड़ किमी. 17
वरुण   –  450 करोड़ किमी. 8

उपग्रह (SATELLITE) –

कुछ आकाशीय पिंड, अपने ग्रह की परिक्रमा करते हुए सूर्य की परिक्रमा पूरी करते हैं। जैसे चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है ।यह अपने ग्रह की परिक्रमा करने के कारण ‘उपग्रह’ कहलाते हैं ।यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक ग्रह का उपग्रह हो सभी ग्रहों के उपग्रहों की संख्या समान होना भी जरूरी नहीं है ।जैसे हमारे सौरमंडल में कुछ ग्रहों का एक भी उपग्रह नहीं है ,और किसी ग्रह के 20 उपग्रह हैं।

जैसे हमारी पृथ्वी का एक अकेला उपग्रह चंद्रमा है, जो पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

क्षुद्र ग्रह (ASTEROIDS) –

ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त अनेक छोटे-छोटे पिंड भी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं। इन आकाशीय पिंडों को ‘क्षुद्रग्रह’ कहते हैं ।ये मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच में पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों की राय है कि क्षुद्रग्रह, ग्रहों से ही टूटे हुए हिस्से हैं ,जो बहुत समय पहले ग्रहों से टूटकर अलग हो गए थे।

उल्का पिण्ड (METEOROIDS) –

सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाने वाले पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों को ‘उल्का पिंड’ कहते हैं ।ये कभी-कभी पृथ्वी के इतने निकट आ जाते हैं कि पृथ्वी के वायुमंडल की उसके साथ रगड़कर के जलने लगते हैं और जलकर पृथ्वी पर गिर जाते हैं ।इस प्रक्रिया में चमकदार प्रकाश उत्पन्न होता है ।इन्हें ही टूटता हुआ तारा समझ आ जाता है, जिसे उल्कापिंड कहते हैं।

सूर्य (SUN) –

सूर्य हमारे सौरमंडल का तारा है।यह सौरमंडल के केंद्र में स्थित है ,और सभी ग्रह, उपग्रह ,व क्षुद्रग्रह निरंतर इस के चक्कर लगाते रहते हैं। सूर्य हाइड्रोजन, हीलियम जैसे बहुत से गर्म गैसों से बना है ,जो लगातार जलती रहती है। सौरमंडल में सूर्य प्रकाश व ऊर्जा का एकमात्र स्रोत है ।सूर्य हमारी पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है ।इस कारण इसका प्रकाश लगभग 8.3 मिनट में पृथ्वी पर पहुंच पाता है। प्रकाश की चाल 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

सूर्य को खोखला करके यदि उसमें पृथ्वी को घर आ जाए तो सूर्य के अंदर 13 लाख पृथ्वियां समा सकती है।

सूर्य के बारे में विस्तृत जानकारी ……

पृथ्वी (EARTH) –

हमारी पृथ्वी जिस पर हम निवास करते हैं ,वह भी एक ग्रह है। यह दूरी में क्रम से सूर्य से तीसरे स्थान पर है। आकार में या सौरमंडल का पांचवां सबसे बड़ा ग्रह है। यदि पृथ्वी सूर्य से अधिक निकट होती तो बहुत अधिक ताप के कारण यहां जीवन संभव नहीं होता और यदि अधिक दूरी पर होती तो अधिक ठंडी के कारण यहां कोई जीवधारी ना होता। पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जहां जीवन है। जीवन के लिए उपयुक्त दर्शाएं केवल हमारी पृथ्वी पर ही मिलती है ।इसी कारण है इसे हरितगृह (ग्रीन प्लेनेट )कहते हैं। इस दृष्टि से हमारी पृथ्वी सौरमंडल के अनोखी है पृथ्वी पर जल की मात्रा अधिक है। इस कारण अंतरिक्ष से देखने पर यह नीले रंग की दिखाई देती है। इसलिए पृथ्वी को ‘नीला ग्रह'(ब्लू -प्लेनेट) भी कहते हैं। Solar System Planet Saur Mandal

चन्द्रमा (MOON) –

चंद्रमा पृथ्वी का अकेला ग्रह है।जो कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य की परिक्रमा भी पूरी करता है।तथा इसकी पृथ्वी से दूरी लगभग 4 लाख किलोमीटर है ।यह लगभग 27 दिन 7 घंटा 43 मिनट ( 27.3 दिन लगभग) में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करता है। 

चंद्रमा के बारे में विस्तृत जानकारी…

सौर मंडल के पुच्छल तारे –

पुच्छल तारे (COMET) –

पुच्छल तारे चट्टानों,बर्फ द्वारा धूल और गैस के बने आकाशीय – पिंड होते हैं ।अक्सर यह आकाशीय – पिंड अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य के पास आ जाते हैं ।सूर्य के ताप के कारण इसकी गैस और धूल वाष्प में बदल जाती है। यही वाष्प मुख्य पिण्ड से एक लंबी सी चमकीली पूछ के रूप में बाहर निकल जाती है। गुरुत्वाकर्षण के कारण इस तारे का सिर सूर्य के तरफ तथा पूछ हमेशा बाहर की तरफ होती है , जो आपको चमकती हुई दिखाई देती है।

सौर मंडल के सभी सदस्य एक दूसरे के खिंचाव के कारण संतुलित अवस्था में रहते हैं। अपने अक्ष पर घूमते हुए एक निश्चित मार्ग पर निरंतर गति करते रहते हैं।ये कभी एक – दूसरे के मार्ग पर नहीं जाते इस कारण यह आपस में नहीं टकराते हैं ।आकाशीय पिंड का अपने अक्ष पर घूमना ‘परिभ्रमण’ (ROTATION) कहलाता है। ग्रहों का सूर्य (तारा) के चारों ओर घूमना ‘परिक्रमण’ (REVOLUTION) कहलाता है। Solar System Planet Saur Mandal

हमारा सौरमंडल तो ब्रह्मांड का एक बहुत छोटा भाग है ।हमारे सौरमंडल जैसे कई सौरमंडल मिलकर एक ‘तारामंडल’ बनाते हैं। जैसे – ‘सप्तर्षि तारामंडल’ । करोडों तारामंडल मिलकर एक ‘मंदाकिनी'(Galaxy) का निर्माण करते हैं। मंदाकिनी, आकाश में एक और से दूसरी और तक फैली चौड़ी सफेद लाखों तारों से भरी चमकदार पट्टी है ।हमारे मंदाकिनी का नाम ‘आकाशगंगा'(Milkyway) है ।इस प्रकार के लाखों मंदाकिनी मिलकर ब्रह्याण्ड(Universe) का निर्माण करती है।

हमारे सौरमंडल में 24 अगस्त 2006 से पहले 9 ग्रह माने जाते थे । किंतु 24 अगस्त 2006  को अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (I.A.U.) ने यम (Pluto) को ग्रह की श्रेणी से हटा दिया हैं।इसलिए अब ग्रहों की कुल संख्या 8 रह गई है।

Solar System Planet Saur Mandal

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