Famous Mosque Delhi Hindi / दिल्ली की प्रमुख मस्जिदें / Famous Mosques of Delhi in Hindi
मस्जिद अरबी का शब्द है जिसका अर्थ है “नमाज पढने की जगह”. इसे मसीत भी कहा जाता है. इधर दिल्ली की ठेठ बोली में इसे महजिद भी कहते हैं. सामान्यत: इस स्थान पर एक भवन का निर्माण किया जाता है, जिसके आंगन या चबूतरे पर नमाज अदा की जा सके.
धार्मिक विश्वास के अनुसार मस्जिद बनवाने वाले व्यक्ति को इसके परिसर में एक भवन मिलता है. विशालता, भव्यता, और वास्तुकला की दृष्टि से लाल किले के पश्चिम में कोई एक किलोमीटर की दुरी पर भोजाला पहाड़ी के अवशेषों पर तीन द्वारों वाली (पूर्व, उत्तर, दक्षिण) जामा मस्जिद की बुनियाद शाहजंहा के शासनकाल में 1650 में रखी गयी और इसको बनने में 6 साल लगे. जनधारणा के अनुसार किसी काल में भोजाला पहाड़ी के पूर्व में यमुना बहती थी और यह पवित्र तीर्थ स्थल था
दिल्ली की प्रसिद्ध मस्जिदें: इतिहास, वास्तुकला और धार्मिक महत्व
भारत की राजधानी दिल्ली हमेशा से संस्कृति, कला और धर्म का संगम रही है। यहाँ पर कई ऐतिहासिक किले, महल और मंदिर तो हैं ही, साथ ही अनेक ऐसी प्रसिद्ध मस्जिदें (Mosques) भी हैं जो अपनी खूबसूरत वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती हैं। दिल्ली की मस्जिदें न सिर्फ इबादतगाह हैं, बल्कि इतिहास और कला का बेहतरीन उदाहरण भी पेश करती हैं।
इस आर्टिकल में हम आपको बताएँगे दिल्ली की सबसे प्रसिद्ध मस्जिदों के बारे में, उनका इतिहास, उनकी खासियत और उनका धार्मिक महत्व।
1. जामा मस्जिद – दिल्ली की शान
जामा मस्जिद को दिल्ली की सबसे प्रसिद्ध और बड़ी मस्जिद माना जाता है। इसे मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1656 में बनवाया था।
- वास्तुकला: लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी यह मस्जिद बेहद खूबसूरत है। इसमें तीन बड़े गुम्बद और दो ऊँचे मीनार हैं।
- क्षमता: यहाँ एक साथ 25,000 से ज्यादा लोग नमाज़ अदा कर सकते हैं।
- खासियत: जामा मस्जिद के आँगन में इस्लामी वास्तुकला की बारीकी देखी जा सकती है। ईद के मौके पर यहाँ रौनक देखते ही बनती है।
- स्थान: पुरानी दिल्ली, चांदनी चौक के पास।
2. फतेहपुरी मस्जिद
फतेहपुरी मस्जिद को शाहजहाँ की बेगम फतेहपुरी ने 1650 में बनवाया था।
- वास्तुकला: लाल पत्थरों से बनी यह मस्जिद सरल लेकिन आकर्षक है।
- महत्व: भारत-पाकिस्तान बँटवारे के समय यहाँ शरणार्थियों को रखा गया था।
- खासियत: चांदनी चौक के पश्चिमी छोर पर स्थित यह मस्जिद आज भी दिल्ली की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है।
3. कुतुब मस्जिद (कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद)
यह दिल्ली की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। इसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1193 में बनवाया था।
- वास्तुकला: यह मस्जिद कुतुब मीनार परिसर में स्थित है और इसमें हिन्दू और जैन मंदिरों से लिए गए स्तंभों का उपयोग किया गया है।
- खासियत: यह भारत की पहली मस्जिदों में से मानी जाती है।
- महत्व: इतिहासकारों के अनुसार, यह मस्जिद दिल्ली में इस्लाम की जड़ें जमाने का प्रतीक है।
4. जामा मस्जिद (नई दिल्ली) – जामा मस्जिद कश्मीरी गेट
पुरानी दिल्ली की मशहूर जामा मस्जिद के अलावा, कश्मीरी गेट इलाके में भी एक जामा मस्जिद स्थित है।
- वास्तुकला: यह अपेक्षाकृत छोटी है लेकिन इसकी डिजाइन बेहद सुंदर है।
- महत्व: यह मस्जिद 19वीं सदी में बनी और यहाँ की स्थानीय मुस्लिम आबादी के लिए धार्मिक केंद्र है।
5. नहर वाली मस्जिद
यह मस्जिद दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास स्थित है।
- इतिहास: इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में नवाब शुजा-उद-दौला ने करवाया था।
- खासियत: यहाँ कभी एक नहर बहती थी, इसी कारण इसका नाम “नहर वाली मस्जिद” पड़ा।
- स्थान: बाराखंभा रोड, नई दिल्ली।
6. मोती मस्जिद (लाल किला परिसर)
मोती मस्जिद को 1659 में शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने बनवाया था।
- वास्तुकला: यह मस्जिद सफेद संगमरमर से बनी है, इसलिए इसे मोती मस्जिद कहा जाता है।
- खासियत: यह मस्जिद आकार में छोटी लेकिन बेहद खूबसूरत है।
- महत्व: यहाँ बादशाह और शाही परिवार नमाज़ पढ़ते थे।
7. खैरुल मंजिल मस्जिद
खैरुल मंजिल मस्जिद को मुगल काल की बेगम महम अंग (अकबर की पालनहार माँ) ने बनवाया था।
- स्थान: पुराना किला और हुमायूँ के मकबरे के पास।
- वास्तुकला: लाल पत्थर और संगमरमर का शानदार मिश्रण।
- खासियत: यह मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
8. सिरकीवालान मस्जिद
चांदनी चौक की गलियों में स्थित यह मस्जिद भी दिल्ली की पुरानी और खूबसूरत मस्जिदों में गिनी जाती है।
- इतिहास: इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में हुआ।
- खासियत: इसकी नक्काशी और शांति वातावरण लोगों को आकर्षित करता है।
दिल्ली की मस्जिदों का महत्व
- ये मस्जिदें सिर्फ इबादतगाह ही नहीं बल्कि दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर भी हैं।
- यहाँ से मुगल और सल्तनत काल के इतिहास की झलक मिलती है।
- देश-विदेश से लाखों पर्यटक हर साल इन मस्जिदों को देखने आते हैं।
- ईद और रमजान के समय इन मस्जिदों में विशेष रौनक होती है।
दिल्ली की प्रसिद्ध मस्जिदों की सूची (तालिका)
| मस्जिद का नाम | निर्माण वर्ष | किसने बनवाई | स्थान | खासियत |
|---|---|---|---|---|
| जामा मस्जिद | 1656 | शाहजहाँ | पुरानी दिल्ली | भारत की सबसे बड़ी मस्जिद |
| फतेहपुरी मस्जिद | 1650 | बेगम फतेहपुरी | चांदनी चौक | ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व |
| कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद | 1193 | कुतुबुद्दीन ऐबक | कुतुब मीनार परिसर | भारत की पहली मस्जिद |
| मोती मस्जिद | 1659 | औरंगजेब | लाल किला परिसर | सफेद संगमरमर से निर्मित |
| नहर वाली मस्जिद | 18वीं सदी | नवाब शुजा-उद-दौला | बाराखंभा रोड | नहर के कारण नाम पड़ा |
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दिल्ली में बादशाह और अमीरों द्वारा निर्मित मस्जिदें प्रमुख स्थानों पर है. फ़तेहपुरी मस्जिद 1650 ई में शाहजहाँ की बेगम नबाब फतेहपुरी ने बनवाई
फैजबाज़ार की अकबराबादी मस्जिद 1650 ई में शाहजहाँ की दूसरी बेगम नबाब अकबरी ने बनवाई
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शाहजहाँ की तीसरी बेगम सरहिंदी बेगम ने 1650 में लाहौरी दरवाजे के पास सरहिंदी मस्जिद बनवाई.
Famous Mosque Delhi Hindi
मस्जिद नवाब औरंगाबादी सन 1703 में औरंगजेब की बेगम ने बनवाई. जिन अल मस्जिद औरंगजेब की बहन ने 1760 में नदी के तट पर बनवाई.
रौशन-अल-दुल्लाह (मोहम्मद शाह के बड़े अमीर) ने 1721 में घंद्नी चौक की सुनहरी मस्जिद का निर्माण करवाया.
दरीबे की शरीफ-उद्-दौला की मस्जिद 1722 ई में बनी
कश्मीरी गेट की मस्जिद नवाब सुजान खान की बेगम फर्क-अल-निसा ने 1728 में बनवाई
सूफी संत अपनी आध्यात्मिक पहचान का सिक्का लोगों पर जमा चुके थे. धर्मांतरण के कारण बढ़ी हुयी संख्या को अब नई मस्जिदों की जरुरत थी इसलिए शहर के विभिन्न भागों में अनेक मस्जिदें बनीं. कुछ के लिए मंदिरों की सामग्री का प्रयोग किया गया. कुछ मस्जिदों के नाम व्यक्तिवाचक तो कुछ गूढ़ या भाववाचक बनें. Famous Mosque Delhi Hindi
दिल्ली की प्रमुख मस्जिदें (Famous Mosques of Delhi)
दिल्ली की कुछ मस्जिदों के नाम निम्न हैं जिन्हें मोहल्ले के अमीर मनसबदारों, व्यापारियों तथा दस्तकारों ने बनवाया जैसे:
- मस्जिद अनारकली
- मस्जिद खजूर मस्जिद आमवाली
- खजूरी
- मस्जिद जंगले वाली
- मस्जिद सुनहरी
- मस्जिद काली खिड़की
- मस्जिद पतली
- मस्जिद ऊँची
- मस्जिद काला खां
- नीर मस्जिद
- मस्जिद तेवर खां
- मस्जिद फकर-उल
- मस्जिद शेरशाह
- मस्जिद शौकत अली
- मस्जिद शाह गुल
- मस्जिद घटा
- मस्जिद पंखे वाली
- मस्जिद बेगम पुल
- मस्जिद कमाली जमाली आदि
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शहर के पुरातत्व विभाग द्वारा 20वी सदी के आरम्भ में किये सर्वेक्षण के अनुसार यहाँ 410 ढाँचे थे. शहरी भाग में बनी 202 मस्जिदें 1639-1857 के बीच बनी थी Famous Mosque Delhi Hindi
शहर के बाहर बसने वाली आबादियों में सन 1947 के बाद सैकड़ों मस्जिदों का निर्माण हुआ है जहाँ लाऊडस्पीकर की सहायता से अजान की आवाज लोगों के कानों में डाली जाती है
निष्कर्ष
दिल्ली की मस्जिदें इतिहास, धर्म और कला का बेहतरीन संगम हैं। ये सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि दिल्ली की पहचान भी हैं। चाहे जामा मस्जिद की भव्यता हो, फतेहपुरी मस्जिद का सादापन या मोती मस्जिद की खूबसूरती – हर मस्जिद अपने आप में खास है।
अगर आप दिल्ली घूमने आएं तो इन मस्जिदों को देखना न भूलें, क्योंकि ये न सिर्फ वास्तुकला की अनमोल धरोहर हैं बल्कि आपको भारत के गौरवशाली इतिहास से भी जोड़ती हैं।

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