Bhartiy Pahad Parvat Mountains Hindi / भारत के प्रमुख पहाड़ और पर्वत श्रृंखलायें
भारतीय पहाड़ और पर्वत श्रृंखला : पूरी जानकारी
भारत अपनी भौगोलिक विविधता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां मैदान, रेगिस्तान, नदियाँ, जंगल, और समुद्र के साथ-साथ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और लंबी पर्वत श्रृंखलाएँ भी मौजूद हैं। भारतीय पर्वत श्रृंखलाएँ न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक हैं, बल्कि ये देश की जलवायु, नदियों के स्रोत, धार्मिक मान्यताओं और पर्यटन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इस लेख में हम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं, उनकी विशेषताओं और उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे।
1. हिमालय पर्वत श्रृंखला (Himalayan Mountain Range)
हिमालय को दुनिया की सबसे ऊँची पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका अर्थ है – “हिम का आलय” यानी “हिम का घर”।
- लंबाई: लगभग 2,400 किलोमीटर
- फैले क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक
- प्रमुख शिखर: माउंट एवरेस्ट (8,848 मी.), कंचनजंगा, नंदा देवी, धौलागिरी
हिमालय की प्रमुख उप-श्रृंखलाएँ:
- उत्तर या ग्रेट हिमालय (हिमाद्रि): यहाँ विश्व की सबसे ऊँची चोटियाँ हैं।
- मध्य हिमालय (हिमाचल): यहाँ कश्मीर घाटी, कांगड़ा घाटी, मसूरी, शिमला जैसी पहाड़ियाँ आती हैं।
- शिवालिक हिमालय: यह सबसे निचला भाग है, जहाँ कई तराई क्षेत्र और जंगल हैं।
महत्व:
- देश की प्रमुख नदियाँ जैसे गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र यहीं से निकलती हैं।
- यह भारत को ठंडी हवाओं से बचाता है।
- पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से भी यह बेहद खास है।
2. अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravalli Range)
अरावली श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला मानी जाती है।
- लंबाई: लगभग 692 किलोमीटर
- फैले क्षेत्र: राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली
- सबसे ऊँची चोटी: गुरु शिखर (1,722 मी.) – माउंट आबू, राजस्थान में
विशेषताएँ:
- यह भूगर्भीय दृष्टि से दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है।
- माउंट आबू का दिलवाड़ा जैन मंदिर और नक्की झील यहीं पर हैं।
- अरावली श्रृंखला राजस्थान के रेगिस्तान को नियंत्रित करने में मदद करती है।
3. विंध्य पर्वत श्रृंखला (Vindhya Range)
विंध्य पर्वत श्रृंखला उत्तर और दक्षिण भारत को आपस में जोड़ने का कार्य करती है।
- फैले क्षेत्र: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार
- प्रमुख भाग: सतपुड़ा और विंध्य का क्षेत्र
महत्व:
- यह श्रृंखला गंगा और नर्मदा घाटी को अलग करती है।
- ऐतिहासिक दृष्टि से भी इसका महत्व है क्योंकि कई प्राचीन साम्राज्य यहीं बसे।
4. सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला (Satpura Range)
विंध्य के दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला स्थित है।
- फैले क्षेत्र: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़
- प्रमुख शिखर: धूपगढ़ (1350 मी.), पचमढ़ी में
महत्व:
- सतपुड़ा श्रृंखला मध्य भारत की नदियों का जल स्रोत है।
- पचमढ़ी हिल स्टेशन और सतपुड़ा नेशनल पार्क यहीं स्थित हैं।
5. पूर्वी घाट (Eastern Ghats)
पूर्वी घाट समुद्र तट के साथ-साथ पूर्वी भारत में फैला हुआ है।
- फैले क्षेत्र: ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु
- सबसे ऊँची चोटी: अरमकोंडा (1680 मी.) – आंध्र प्रदेश
विशेषताएँ:
- यहाँ की नदियाँ जैसे गोदावरी, महानदी और कृष्णा इस श्रृंखला को काटकर गुजरती हैं।
- यह खनिज संपदा से भरपूर क्षेत्र है।
6. पश्चिमी घाट (Western Ghats)
पश्चिमी घाट को सह्याद्रि पर्वत भी कहते हैं।
- फैले क्षेत्र: महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु
- सबसे ऊँची चोटी: अनैमुदी (2695 मी.) – केरल
महत्व:
- यह क्षेत्र जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है।
- यहाँ की नदियाँ जैसे गोदावरी, कावेरी और ताप्ती निकलती हैं।
- महाबलेश्वर, ऊटी, मुन्नार जैसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन यहीं हैं।
7. काराकोरम पर्वत श्रृंखला (Karakoram Range)
काराकोरम श्रृंखला भारत के उत्तरी भाग में स्थित है।
- प्रमुख शिखर: K2 (8611 मी.) – जिसे गॉडविन ऑस्टिन भी कहते हैं।
- यह दुनिया का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत है।
महत्व:
- सियाचिन ग्लेशियर इसी पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
- यह रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
8. अन्य महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखलाएँ
- नीलगिरी पर्वत: तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में
- अन्नमलाई पहाड़ियाँ: दक्षिण भारत में स्थित
- राजमहल पहाड़ियाँ: झारखंड में
- गरो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ: मेघालय में, जिन्हें “पूर्व का स्कॉटलैंड” कहा जाता है।
भारतीय पर्वत श्रृंखलाओं का महत्व
- जलवायु नियंत्रण: हिमालय भारत को ठंडी हवाओं से बचाता है और मानसून को प्रभावित करता है।
- नदियों का स्रोत: गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी जैसी नदियाँ पर्वतों से निकलती हैं।
- खनिज संपदा: पहाड़ियाँ कोयला, लोहा, बॉक्साइट और अन्य खनिजों से भरपूर हैं।
- जैव विविधता: पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ दुर्लभ वन्यजीव और पौधों के लिए मशहूर हैं।
- पर्यटन और धार्मिक महत्व: हिमालय की बद्रीनाथ, केदारनाथ यात्रा और माउंट आबू जैसे स्थल धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय पहाड़ों का वर्गीकरण
भारतीय पहाड़ और पर्वत श्रृंखला को 2 मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
- हिमालयीय पर्वत
- प्रायद्वीपीय पर्वत
हिमालय पर्वत (Himalaya Mountains)
हिमालय का अर्थ है (हिम+आलय) हिमालय का मतलब ‘हिम का घर’ होता है।
हिमालय की कुल लम्बाई लगभग 5000 किमी है तथा इसकी औसत ऊँचाई 2000 मीटर है।
हिमालय पर्वत श्रेणी को तीन भागों में बाँटा गया है:-
1. महान हिमालय या हिमाद्रि-
इसकी औसत ऊँचाई 6000 मी० है। यह हिमालय पर्वत की सबसे उत्तरी एवं सबसे ऊँची श्रेणी है।
हिमालय के सभी सर्वोच्च शिखर इसी श्रेणी में हैं:
जैसे- एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरी, नंगापर्वत, अन्नपूर्णा आदि। इनमें कंचनजंगा, नंगापर्वत और नन्दादेवी भारत की सीमा में हैं, और शेष नेपाल में हैं।
माउन्ट एवरेस्ट- 8848 मीटर है (इसे नेपाल में सागरमाथा व चीन में क्योमोलांगमा) कहते हैं।
कंचनजंगा – 8598 मीटर (यह भारत में हिमालय की सबसे ऊँची चोटी है यह सिक्किम में स्थित है)
2. मध्य हिमालय या हिमाचल-
इसकी औसत ऊँचाई 3700-4500 मीटर है। इसकी श्रेणी में- कश्मीर, काठमाण्डु, कांगड़ा और कुल्लू घाटियाँ आदि सम्मिलित है।
3. बाहरी हिमालय या शिवालिक-
यह हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी है। इसकी औसत ऊँचाई 1000 मी० है। इसमें मिट्टी और कंकड़ के बने ऊँचे मैदान मिलते हैं,जिन्हें दून या द्वार कहते हैं।
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हिमालय के अलावा उत्तर-पूर्व भारत में कुछ अन्य पर्वत श्रेणियां भी हैं जैसे-
जस्कर व लद्दाख श्रेणी – कश्मीर
पटकई, लूसी, गारो श्रेणी- पूर्वी-राज्य
प्रायद्वीपीय पर्वत- (Peninsular Mountains)
प्रायद्वीपीय पर्वत को 3 मुख्य भागों में बांटा जा सकता है :
1.अरावली पर्वत- (Aravali Hills)
यह राजस्थान से लेकर दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमत तक विस्तृत है।
ये विश्व का सबसे पुराना पर्वत है।
गुरु शिखर(1722मीटर)सबसे ऊँची चोटी है, इसी पर माउण्टआबू स्थित है।
2.विंध्याचल पर्वत- (Vindhyachal Hills)
यह पर्वतमाला पश्चिम मे गुजरात से लेकर पूर्व में उत्तर-प्रदेश तक जाती है।
यह विंध्याचल, भाखर, कैमूर व पारसनाथ पहाड़ियों का सम्मिलित रूप है।
विंध्याचल पर्वत ही उत्तर व दक्षिण भारत को स्पष्ट रूप से अलग करते हैं।
3.सतपुड़ा पर्वत- (Satpuda Hills)
सतपुड़ा पश्चिम में राजपीपला से आरम्भ होकर छोटा नागपुर के पठार तक फैला है।
महादेव और मैकाले पश्चिमी पहाड़ियाँ भी इसी पर्वतमाला का हिस्सा (भाग) है।
भारत के कुछ विशेष पर्वत
पश्चिमी घाट या सह्याद्रि
इनकी औसत ऊँचाई 1200 मीटर है और यह पर्वतमाला 1600 किमी लम्बी है।
इस श्रेणी में दो प्रमुख दर्रे हैं:
1. थालघाट (Thalghat)
2. भोरघाट (Bhorghat)
एक और दर्रा है जो दर्रा पालघाट के नाम से जाना जाता है, जो तमिलनाडु व केरल को जोड़ता है।
पूर्वी घाट
इनकी औसत ऊँचाई 615 मीटर है,यह श्रेणी 1300 किलोमीटर लम्बी है
इस श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी महेन्द्रगिरि है जो 1501 मीटर ऊँची है। Bhartiy Pahad Parvat Mountains Hindi
नीलगिरि या नीले पर्वत (Niligiri Mountains)
नीलगिरि पर्वत तमिलनाडु राज्य में स्थित है, जहाँ पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट आकर मिलते हैं। नीलगिरि की सबसे ऊँची चोटी ‘दोछाबेट्टा’ है
सुदूर-दक्षिण में इलायची की पहाड़ियाँ हैं। इन्हें ‘इल्लामलाई’ पहाड़ी भी कहते है।
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी ‘अन्नाईमुडी’ है। इसकी ऊँचाई 2695 मीटर है जो अन्नामलाई पहाड़ियों
में है।
निष्कर्ष
भारत की पर्वत श्रृंखलाएँ केवल भौगोलिक इकाई नहीं हैं, बल्कि ये हमारी संस्कृति, धर्म, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। हिमालय की ऊँची चोटियाँ, अरावली की प्राचीनता, पश्चिमी घाट की हरियाली और पूर्वी घाट की खनिज संपदा – ये सब मिलकर भारत को विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।
अगर हमें भारत को सही मायनों में समझना है, तो उसके पहाड़ों और पर्वत श्रृंखलाओं को जानना बेहद जरूरी है।

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